25.6.17

अब जमाना कलकतिये ताले और बरेला के तालों का नहीं रहा ....

अब पहले जैसे समय नहीं रहा कि घरों में दुकानों में सुरक्षा के लिए कलकतिये ताले और बरेला के ताले और बड़े बड़े ताले लगाए जाते थे  और जिनकी चाबियाँ भी सुरक्षित रखना पड़ती थी  अगर चाबी गुम जाये तो अंतिम विकल्प ताला तोड़ना ही होता था  । आजकल घरों में दुकानों में और फैक्टरियों के दरवाजों में स्मार्ट लॉक लगाए जा रहे हैं । जैसे जैसे हमारा देश डिजिटली आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे हमारे देश में विदेशों की तर्ज पर आधुनिक सामग्रियों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है । हमारे देश में भी दरवाजों में फिंगर प्रिंट स्मार्ट लॉक, कार्ड स्मार्ट लॉक, वेबकेम लॉक और मोबाईल एप्स के द्धारा खुलने और बंद होने वाले लॉक लगाए जा रहे हैं जो सुविधा और सुरक्षा के लिए उपयोगी हैं ।

अभी हाल में मैं एक जगह रुका था वहां पर दरवाजे में स्मार्ट लॉक लगा था जो स्मार्ट कार्ड दिखाने पर ही खुलता था और बंद होता था और कमरे के अंदर एक पॉकेटनुमा एक डिवाइस लगी थी । दरवाजा खोलने के बाद उस स्मार्ट कार्ड को कमरे के अंदर एक पॉकेटनुमा एक डिवाइस में डालना पड़ता था उसके बाद कमरे की लाइट, पंखे, ऐसी चालू होते थे और उस डिवाइस से कार्ड निकालने पर उस कमरे के फेन लाइट ऐ.सी. अपने आप बंद हो जाते थे । यह सिस्टम मुझे बहुत ही पसंद आया कि इससे बिजली की बचत तो होती ही है और दरवाजे भी सुरक्षित बंद हो जाते हैं ।

दो दिन मैंने कार्ड़ से खूब दरवाजा खोला और बंद किया पर एक सुबह मजेदार घटना हो गई । कमरे के अंदर एक पॉकेटनुमा एक डिवाइस में स्मार्ट कार्ड लगा था और कमरे की लाइट फेन और ऐ.सी. और टीव्ही चालू था अचानक मेरे मन में आया कि कमरे के बाहर लान में थोड़ा टहल लिया जाए तो मैं लुंगी पहिने ही दरवाजा बाहर से खींच कर ( जैसाकि घरों में आदत होती है कि दरवाजा बाहर की और खींच कर बिना ताला लगाये बंद कर देते हैं ) लान में घूमने निकल गया और थोड़ी देर बाद घूम कर वापिस आ कर मैंने दरवाजा खोलना चाहा तो वह नहीं खुला और उस समय मेरी हालत खराब हो गई थी और मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था फिर बाद में मुझे अपनी गलती समझ में आई कि मैंने दरवाजा बाहर की और खींच कर बंद किया था वह उसी समय ऑटोमेटिक बंद होकर लॉक हो गया था और कमरे के अंदर लगी डिवाइस में से स्मार्ट कार्ड नहीं निकाला था । उस समय वहां एक होटल का कर्मचारी खड़ा था उसको मैंने अपनी दिक्कत बताई वह तुरंत दूसरा कार्ड मैनेजमेंट से लेकर आया और मेरे कमरे का लॉक खोला । इन सबका सतर्कता के साथ उपयोग करना जरुरी है और जरा गलती हो जाने पर दिक्कत हो सकती है । एक समय यह आयेगा कि लोगबाग घरों के दरवाजों में तालों की जगह स्मार्ट लॉक का अधिकाधिक उपयोग करेंगें । 

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (27-06-2017) को
"कोविन्द है...गोविन्द नहीं" (चर्चा अंक-2650)
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

संध्या शर्मा ने कहा…

सही है! जब दुनिया स्मार्ट हो गई तो ये ताला क्यों पीछे रहेगा भला :)

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

सब कुछ बदल गया है अब तो .... ऐसे पुराने ताले अब एंटीक हो गए हैं |